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अंग्रेज़ी मीडियम मूवी रिव्यू: हंसते-हंसाते अपनों की अहमियत बयां करती है ये फिल्म

मंझे हुए अदाकार इरफ़ान खान (Irrfan Khan) कैंसर से भी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे मे उनकी फिल्म अंग्रेज़ी मीडियम (Angrezi Medium) रिलीज़ हो रही है।

2,014
  • सिनेमा – अंग्रेज़ी मीडियम
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी ड्रामा
  • अदाकार – इरफ़ान खान, करीना कपूर खान, दीपक डोबरियाल, राधिका मदान
  • निर्देशक – होमी अदजानिया
  • अवधि – 2 घंटे 25 मिनट

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प्रस्तावना

मंझे हुए अदाकार इरफ़ान खान (Irrfan Khan) कैंसर से भी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे मे उनकी फिल्म अंग्रेज़ी मीडियम (Angrezi Medium) रिलीज़ हो रही है। ये फिल्म हिन्दी मीडियम का सिक्वल है, हालांकि दोनों कहानियां अलग हैं। पहली कड़ी और इरफ़ान के कारण फिल्म चर्चा मे है। पर क्या ये आपका मनोरंजन कर पाएगी? आइये जानते हैं।

कहानी

उदयपुर मे मशहूर घसीटाराम मिठाई की दुकान चलाने वाला हलवाई चंपक बंसल (इरफान खान) तीन काम हर वक़्त करता है। पहला, कंफ्यूज रहना। दूसरा, घसीटाराम नाम का अधिकार पाने के लिए भाई गोपी बंसल (दीपक डोबरियाल) संग लड़ाई करना। तीसरा, बेटी तारिका (राधिका मदान) से बेइंतेहा मुहब्बत करना। पत्नी के गुज़रने के बाद चंपक अकेले ही बेटी की परवरिश करता है। तारिका का सपना होता है कि वो विदेश जाकर सबसे अच्छे कॉलेज मे पढ़ाई करे।

काफी मेहनत करके तारिका अच्छे मार्क भी ले आती है। लंदन के सबसे अच्छे कॉलेज से तारिका को बुलावा भी आता है। लेकिन चंपक की एक गलती के कारण तारिका के हाथ से ये मौका चला जाता है। चंपक कसम खाता है वो हर हाल मे बेटी का सपना पूरा करेगा।

आपसी लड़ाई भूलकर गोपी भी चंपक की मदद के लिए आगे आता है। बड़ी जद्दोजहद कर चंपक, गोपी और तारिका लंदन पहुँचते तो हैं पर यहां उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। आगे कहानी मे मिसेज कोहली (डिम्पल कपाड़िया), नैना (करीना कपूर खान) की एंट्री होती है। क्या चंपक अपनी बेटी का सपना पूरा कर पाता है? इसके लिए उसे किन चुनौतियों का सामना करता पड़ता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

कैंसर से जंग लड़ रहे इरफान को फिर एक बार पर्दे पर देखना अनोखा अनुभव देता है। उनकी अदाकारी की प्रशंसा की जाए उतनी कम है। हंसाने, रुलाने और चौंकाने मे उन्होने कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके साथ दीपक डोबरियाल ने भी शानदार अदाकारी की है। राधिका मदान का अच्छा प्रयास है, हालांकि वो और बेहतर हो सकती थीं। डिंपल कपाड़िया छोटी सी भूमिका का छाप छोडती हैं। करीना कपूर खान का काम साधारण हैं। किरदार के अनुसार उन्होने काम किया है। हालांकि ये किरदार कोई और भी आसानी से कर सकती थी।

निर्देशन

निर्देशक होमी अदजानिया ने फिल्म का निर्देशन किया है। उनका कारी प्रशंसनिय है, लेकिन कई जगह बेहतरी की गुंजाइश नज़र आती है।

संगीत

फिल्म का संगीत अच्छा है। कुछ गाने लुभाते हैं, बॅकग्राउंड संगीत कहानी मे जान डालता है।

खास बातें

  1. इरफान खान की अदाकारी
  2. हास्य से भरपूर।
  3. संदेश देती है।
  4. परिवार संग देख सकते हैं।

कमज़ोर कड़ियां

  1. राजस्थानी हिंदी लहजे का अति प्रयोग।
  2. मुद्दे से भटकती है।
  3. कई दृश्य तथ्यहीन, नाटकीय लगते हैं।
  4. फिल्म थोड़ी छोटी हो सकती थी।

देखें या ना देखें

ये एक अच्छी फिल्म है। मनोरंजन के साथ बहुत कुछ सिखाती भी है। आप इसे पूरे परिवार संग देख सकते हैं।

रेटिंग 3.5/5

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