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अर्जुन पटियाला मूवी रिव्यू: हल्की-फुल्की कॉमेडी से भरपूर

दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh), कृति सैनन (Kriti Sanon) और वरुण शर्मा (Varun Sharma) की फिल्म अर्जुन पटियाला (Arjun patiala) रिलीज़ हो चुकी है।

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  • सिनेमा – अर्जुन पटियाला
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी
  • अदाकार – दिलजीत दोसांझ, कृति सैनन, वरुण शर्मा, रोनित रॉय, मोहम्मद ज़ीशान, सीमा पाहवा
  • निर्देशक – रोहित जुगराज चौहान
  • अवधि – 1 घंटा 50 मिनट

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प्रस्तावना

दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh), कृति सैनन (Kriti Sanon) और वरुण शर्मा (Varun Sharma) की फिल्म अर्जुन पटियाला (Arjun patiala) रिलीज़ हो चुकी है। आइये जानते हैं यह फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं।

कहानी

पटियाले के अर्जुन पटियाला (दिलजीत दोसांझ) के माता-पिता का सपना होता है कि उनका बेटा एक पुलिस अफ़सर बने। अर्जुन पटियाला भी बड़ा होकर अपने हीरो इंस्पेक्टर गिल (रोनित रॉय) की तरह पुलिस वाला बनना चाहता है। और स्पोर्ट्स में मैडल जीतकर अर्जुन पटियाला फिरोजपुर का चौकी इंचार्ज बन जाता है। जहां उसे असिस्ट करता है ओनिडा सिंह (वरुण शर्मा)। यहीं अर्जुन की ज़िंदगी में आती है बिजली से तेज़ रिपोर्टर ऋतू रंधावा (कृति सैनन)। शहर के गुंडों के बारे में अर्जुन ऋतू से जानकारी लेता है और फिर ओनिडा के साथ मिलकर अपराधियों के खात्मे में लग जाता है।

सब कुछ बड़े मज़ेदार ढंग से होता है। लेकिन तभी कहानी में चौंकाने वाला मोड़ भी आता है। वो मोड़ क्या होता है? क्या अर्जुन शहर से गुंडों का सफ़ाया करने में कामयाब होता है? इस काम में उसे क्या क्या दिक्कते आती हैं? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

दिलजीत दोसांझ क्यूट पुलिस अफसर की भूमिका में जचते हैं। कृति सैनन और वरुण शर्मा ने अच्छी अदाकारी की है। मोहम्मद जीशान छाप छोड़ने में कामयाब हुए हैं। सीमा पाहवा और रोनित रॉय आकर्षित करने में कामयाब हुए हैं।

निर्देशन

रोहित जुगराज चौहान ने कहानी के अनुसार निर्देशन किया है। लेकिन कई जगह वो और बेहतर हो सकते थे।

संगीत

सचिन-जिगर ने फिल्म का संगीत दिया है। जो ज़्यादा प्रभावित नहीं करता है। बैकग्राउंड स्कोर भी ठीक-ठाक ही है।

ख़ास बातें

  1. हलकी-फुलकी कॉमेडी मज़ेदार लगती है।
  2. कास्टिंग अच्छी है।
  3. पूरे परिवार संग देख सकते हैं।

कमजोर कड़ियाँ

  1. कहानी में जान नहीं है।
  2. ऐसी फ़िल्में और कॉमेडी पहले भी देख चुके हैं।
  3. ज़्यादा बड़ी ना होने के बावजूद फिल्म धीमी लगती है।
  4. संवाद और निर्देशन और बेहतर हो सकते थे।
50%
ठीक-ठाक

देखें या ना देखें

आपके पास बहुत समय है और आप यदि कोई हलकी-फुलकी कॉमेडी फिल्म देखना चाहते हैं तो इसे आप देख सकते हैं।

  • रेटिंग

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