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बाला रिव्यू: गंजेपन, काले रंग और मोटापे के प्रति समाज के दृष्टिकोण पर कटाक्ष

गंजेपन पर आधारित आयुष्मान खुराना (ayushmann khurrana) की फिल्म बाला (Bala) विवादों के कारण चर्चा मे बनी है। कई आरोपों के बावजूद फिल्म आखिरकार रिलीज़ हो रही है।

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  • सिनेमा – बाला
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी ड्रामा
  • अदाकार – आयुष्मान खुराना, भूमि पेडनेकर, यामि गौतम, सौरभ शुक्ला, सीमा पाहवा
  • निर्देशक – अमर कौशिक
  • अवधि – 2 घंटे 13 मिनट

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प्रस्तावना

गंजेपन पर आधारित आयुष्मान खुराना (ayushmann khurrana) की फिल्म बाला (Bala) विवादों के कारण चर्चा मे बनी है। कई आरोपों के बावजूद फिल्म आखिरकार रिलीज़ हो रही है। स्त्री के निर्माता निर्देशक और आयुष्मान खुराना जैसे कलाकार होने के कारण फिल्म चर्चा मे बनी हुई है। बाला से दर्शकों को बहुत उम्मीदें हैं। आइये जानते हैं फिल्म अपनी उम्मीदों पर खरी उतर पाई है या नहीं।

कहानी

निर्माता दिनेश विजन और अमर कौशिक ने एक बार फिर यूपी की कहानी चुनी है। बाला की कहानी कानपुर शहर की है। जो निरेन भट्ट ने लिखी है। 25 वर्ष की आयु मे बालमुकुन्द उर्फ़ बाला (आयुष्मान खुराना) के 45 प्रतिशत बाल झड़ चुके हैं। कभी सबका हीरो रह चुका बाला गंजेपन के कारण हंसी का पात्र बन जाता है। इस गंजेपन से छुटकारा पाने के लिए बाला हर कामयाब कोशिश करता है। इसी बीच बाला को टिकटॉक स्टार परी (यामि गौतम) से प्यार हो जाता है। दोनों की शादी भी हो जाती है। लेकिन अचानक परी को बाला की सच्चाई पता चल जाती है। फिर बाला की ज़िंदगी मे आता है सबसे बड़ा तूफ़ान।

इस तूफ़ान से उबरने के लिए बाला को उसकी बचपन की दोस्त लतिका (भूमि पेडनेकर) से मदद मांगता है। लतिका बेहद काली है और बचपन मे खुद बाला को भी उसके कालेपन से चिढ़ थी। इस कारण बाला ने उससे रिश्ता भी तोड़ लिया था। तो क्या बाल को माफ़ कर लतिका उसका साथ देती है? क्या परी बाला को फिर अपनाती है? क्या बाला अपनी ज़िंदगी मे आए तूफ़ान से उबर पाता है या नहीं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

आयुष्मान खुराना ने एक बार फिर बाला से बेहद हटके और शानदार किरदार निभाने की परंपरा बरक़रार रखी है। आयुष्मान ने इस किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया है कि इसे हमेशा याद किया जाएगा। भूमि पेडनेकर ने भी काले रंग के कारण ताने खाने वाली लड़की का किरदार गज़ब ढंग से निभाया है। यामि गौतम भी टिकटॉक गर्ल की भूमिका मे जचती हैं। इनके अलावा सौरभ शुक्ला, जावेद जाफ़री, सीमा पाहवा जैसे कलाकार भी आकर्षित करते हैं।

निर्देशन

स्त्री फिल्म से निर्देशन के क्षेत्र मे शानदार कदम रखने वाले निर्देशक अमर कौशिक ने बाला का निर्देशन किया है। दर्शकों को बांधे रखने, मनोरंजन करने और ज़रूरी संदेश पहुंचाने मे अमर कौशिक कामयाब हुए हैं। शानदार तरीके से उन्होने फिल्म का निर्देशन किया है।

संगीत

फिल्म का संगीत सचिन-जिगर ने दिया है। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर ठीक-ठाक है।

खास बातें

  1. गंभीर विषय को हास्य व्यंग के स्वरूप मे सहजता से रखा गया है।
  2. कहानी मनोरंजक और संदेश से भरपूर है।
  3. आखिर तक बांधे रखती है।
  4. परिवार के साथ देख सकते हैं।

कमज़ोर कड़ियां

  1. शुरुआत धीमी है।
  2. पहला हिस्सा कुछ देर तक उबाता है।
  3. संगीत और बेहतर हो सकता था।

 

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