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भांगड़ा पा ले मूवी रिव्यू: जितना थिरकेंगे उतना ही ऊबेंगे

आरएसवीपी की फिल्म भांगड़ा पा ले (Bhangra Paa Le) आखिरकार रिलीज़ हो रही है। फिल्म ज़बरदस्त भांगड़ा डांस से भरे ट्रेलर और गानों के कारण चर्चा मे है।

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  • सिनेमा – भांगड़ा पा ले
  • सिनेमा प्रकार – म्यूज़िकल ड्रामा
  • कलाकार – सनी कौशल, रुख्सार ढिल्लन, श्रेया पिलगाँवकर, परमित सेठी
  • निर्देशक – स्नेहा तौरानी
  • अवधि – 2 घंटे 10 मिनट

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प्रस्तावना

आरएसवीपी की फिल्म भांगड़ा पा ले (Bhangra Paa Le) आखिरकार रिलीज़ हो रही है। फिल्म ज़बरदस्त भांगड़ा डांस से भरे ट्रेलर और गानों के कारण चर्चा मे है। आइये जानते हैं फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं।

कहानी

कहानी की शुरुआत 1944 मे हो रहे युद्ध से होती है। अंग्रेजों की तरफ से लड़ने वाला फौजी कप्तान (सनी कौशल) घायल हो जाता है। फिर कहानी सीधे कट टू आजके दौर मे आ जाती है। जहांअमृतसर के खालसा कॉलेज के स्टूडेंट जग्गी (सनी कौशल) को भांगड़ा डांस प्रतियोगिता के लिए एक भंगड़ी यानी भांगड़ा मे माहिर डांसर की तलाश होती है। एक शादी मे सनी की मुलाक़ात सिमी (रुख्सार ढिल्लन) से होती है। रुख्सार के भांगड़ा डांस पर सनी फ़िदा हो जाता है। दोनों एक दूसरे को काफी पसंद भी करते हैं। दोनों का सपना होता है एक साथ भांगड़ा करें और डांस प्रतियोगिता जीतकर लंदन जाएं। सनी सिमी से मिलकर कप्तान की कहानी सुनाता है। फिर फिल्म मे एक साथ 1944 और आजकी कहानी आगे  बढ़ती है।

आगे सनी को पता चलता है सिमी दूसरे कॉलेज से इसी प्रतियोगिता मे हिस्सा ले रही है। इसी कारां दोनों के रिश्ते मे दरार आ जाती है। अपने अतीत के कारण दोनों इस प्रतियोगिता को जीतना चाहते हैं। इनका अतीत क्या होता है? दोनों लंदन क्यों जाना चाहते हैं? कप्तान कौन था ? प्रतियोगिता कौन जीतता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

सनी कौशल ने दोहरी भूमिका निभाई है। दोनों किरदार मे वो ख़ूब जचे हैं। भांगड़ा करने के लिए जो उत्साह आवश्यक है वो उनमे नज़र आता है। रुख्सार ढिल्लन मे भी आत्मविश्वास नज़र आता है। डांस मे भी ये काफी अच्छी लगती हैं। श्रेया पिलगांवकर और परमितट सेठी प्रभवित करते हैं।

निर्देशन

स्नेहा तौरानी का निर्देशन ठीक है। हालांकि कई जगह वो और बेहतर हो सकती थीं।

संगीत

फिल्म भांगड़ा पर आधारित है तो उसके अनुसार संगीत दिया गया है। जो अच्छा लगता है।

खास बातें

  1. भांगड़ा नृत्य का लाजवाब प्रदर्शन।
  2. संगीत लुभावना है।
  3. कुछ दृश्य दिल को छु जाते हैं।

कमजोर कड़िया

  1. धीमी शुरुआत।
  2. मनोरंजन की कमी।
  3. गानों की आनावश्यक भरमार।
  4. उबाती है।

देखें या ना देखें

यदि आप भांगड़ा को हद से ज़्यादा प्यार करते हैं तो ही इस फिल्म को बर्दाश्त कर सकते हैं। उपरोक्त मुद्दों को मद्दे नज़र रखते हुए आप स्वयं निर्णय लें।

रेटिंग – 2/5

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