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जय मम्मी दी रिव्यू: ना हँसाती है और ना कुछ सिखाती है, बस उबाती है

पूनम ढिल्लन (poonam Dhillon), सुप्रिया पाठक (supriya pathak), जैसी वरिष्ठ अदाकार एक नए विषय के साथ जय मम्मी दी लेकर हाज़िर हो रहे हैं।

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  • सिनेमा – जय मम्मी दी
  • सिनेमा प्रकार – रोमांटिक कॉमेडी
  • अदाकार – सनी सिंह, सोनाली सैगल, सुप्रिया पाठक, पूनम ढिल्लन
  • निर्देशक – नवजोत गुलाटी
  • अवधि – 1 घंटा 45 मिनट

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प्रस्तावना

पूनम ढिल्लन (poonam Dhillon), सुप्रिया पाठक (supriya pathak), जैसी वरिष्ठ अदाकार एक नए विषय के साथ जय मम्मी दी लेकर हाज़िर हो रहे हैं। सनी सिंग (sunny singh) और सोनाली सैगल (sonnalli seygall) जैसे अदाकार फिल्म मे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। ट्रेलर मे मम्मीयों की जंग देख फैंस फिल्म के लिए उत्साहित हैं। आइये जानते हैं ये फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं।

कहानी

दिल्ली की लाली (सुप्रिया पाठक) और पिंकी (पूनम ढिल्लन) एक दूसरे की जानी दुश्मन हैं। दोनों एक दूसरे को एक आँख नहीं भाते और एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोडते। लाली का एक बेटा है पुन्नु (सनी सिंह) और पिंकी की एक लड़की है साँझ (सोनाली सैगल)। यहाँ कहानी मे ट्विस्ट है, लाली औ पिंकी एक दूसरे से जितनी नफरत करते हैं, पुन्नु और साँझ एक दूसरे पर उतना ही मरते हैं। लेकिन अपनी माओं की दुशमी के कारण दोनों का ब्रेकअप हो जाता है।

ऐसे मे साँझ की शादी तय हो जाती है। तो पुन्नु भी एक लड़की पसंद कर लेता है। लेकिन फिर भी दोनों दिल एक दूसरे के लिए धड़कता है। लाली और पिंकी मे ऐसी क्या दुश्मनी होती है? क्या पुन्नु और साँझ एक दूसरे के हो पाते हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

सनी सिंह और सोनाली सैगल ने मुख्य भूमिका निभाई है। सनी सिंह ने अच्छा प्रयास किया है हालांकि सोनाली को और मेहनत की ज़रूरत नज़र आती है। सुप्रिया पाठक और पूनम ढिल्लन ने जो मिला उसे अच्छे से करने की कोशिश की है। हालांकि इसमे कुछ कमी सी नज़र आती है। बाकी कलाकारों ने भी ठीक ठाक अदाकारी की है।

निर्देशन

नवजोत गुलाटी ने फिल्म का निर्देशन किया है। इसमे बेहतरी की गुंजाइश नज़र आती है

संगीत

फिल्म का संगीत ठीक है लेकिन प्रभावित नहीं करता। मेरे मम्मी ने पसंद नहीं तू पहले से ही हिट है। बैकग्राउंड स्कोर कमज़ोर है।

खास बातें

  1. कुछ दृश्य गुदगुदाते हैं।
  2. पारिवारिक फिल्म है।

कमज़ोर कड़ियां

  1. फिल्म की कहानी कई बार भटक जाती है।
  2. संवाद बहुत कमज़ोर हैं।
  3. आख़िर तक बैठे रहना मुश्किल।
  4. गाने बेवजह लगते हैं।

देखें या ना देखें

इस फिल्म को आप ना देखें तो बेहतर है।

रेटिंग – 1.5/5

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