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जजमेंटल है क्या मूवी रिव्यू: सिर्फ़ कंगना के फैंस के लिए बनी है यह फिल्म

विवादित अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut)और बेहतरीन अभेनेता राजकुमार राव (Rajkummar Rao ) की फिल्म जजमेंटल है क्या (Judgemental Hai Kya) आख़िरकार रिलीज़ हो गई है।

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  • सिनेमा – जजमेंटल है क्या
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी थ्रिलर
  • कलाकार – कंगना रनौत, राजकुमार राव, जिमी शेरगिल, अमायरा दस्तूर
  • निर्देशक – प्रकाश कोवलामुड़ी
  • अवधि – 2 घंटे 1 मिनट

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प्रस्तावना

विवादित अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut)और बेहतरीन अभेनेता राजकुमार राव (Rajkummar Rao ) की फिल्म जजमेंटल है क्या (Judgemental Hai Kya) आख़िरकार रिलीज़ हो गई है। पोस्टर, ट्रेलर और विवादों के कारण फिल्म ख़ूब चर्चा में रही, पर क्या यह आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं? आइये जानते हैं।

कहानी

घरेलु हिंसा की शिकार होने के कारण बॉबी (कंगना रनौत) बचपन से ही मानसिक रोगी होती है। बॉबी जैसे जैसे बड़ी होती है वैसे वैसे उसकी बिमारी भी बढ़ जाती है। किसी पर भी शक करना, किसी को कुछ भी बोल देना, यहां तक कि किसी को मार देना बॉबी की पसंदीदा हॉबीज़ होती हैं। ऐसी अजूबा बॉबी के घर केशव (राजकुमार राव) अपनी पत्नी रीमा (अमायरा दस्तूर) संग रहने आता है। बॉबी किराएदार केशव पर अपनी हॉबीज़ आज़माना शुरू करती है। यानी बॉबी को लगता है केशव अपनी पत्नी रीमा को मार डालेगा। इसी बीच  रीमा की डेथ हो जाती है। पर बॉबी को लगता है यह मर्डर है और केशव ने ही इसे अंजाम दिया है। हालांकि पुलिस इस मामले को एक्सीडेंटल डेथ बताकर फाइल क्लोज़ कर देती है।

2 साल गुज़र जाते हैं और इस बीच बॉबी दो बार मेंटल हॉस्पिटल जाकर आ जाती है। 2 साल बाद एक बार फिर विदेश में बॉबी और केशव की मुलाक़ात होती है। बॉबी फिर कहती है कि केशव कातिल है। केशव कहता है कि बॉबी पागल है। सच क्या है? क्या वाकई केशव कातिल है? या यह महज़ बॉबी का पागलपन है? इन सवालों के जवाब जानने के लीये आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

कंगना रनौत ने अपने किरदार को जिया है। उनकी अदाकारी देख ऐसा महसूस होता है कि वाकई वो ऐसी ही हैं। राजकुमार राव का ज़्यादा काम नहीं है। पर जितना भी है उन्होंने ठीक किया है। हालांकि इससे बेहतरीन किरदार वो पहले ही निभा चुके हैं। इनके अलावा हुसेन दलाल प्रभावित करते हैं। अमायरा दस्तूर छोटी सी भूमिका में छाप छोडती हैं।

निर्देशन औरछायांकन

प्रकाश कोवलामुड़ी ने फिल्म का निर्देशन किया है तो पंकज कुमार ने छायांकन की बागडोर संभाली है। कहानी के अनुसार दोनों चीजें अच्छी लगती हैं।

संगीत

तनिष्क बागची समेत कुछ अन्य संगीतकारों ने भी फिल्म में संगीत दिया है। वखरा स्वैग सबसे लोकप्रिय हुआ लेकिन वो अंत में आता है। बैकग्राउंड स्कोर कहीं प्रभावित करता  है।

ख़ास बातें

  1. कंगना रनौत की अदाकारी।
  2. कहानी अंत तक बांधे रखती है।
  3. निर्देशन, छायांकन और बैकग्राउंड स्कोर।

कमज़ोर कड़ियाँ

  1. दूसरे हिस्से में कहानी बे सिर पैर जैसी या अटपटी लगती  है।
  2. राजकुमार राव का किरदार बहुत कम है।
  3. कुछ सीन भ्रम निर्माण करते हैं।
  4. आम दर्शकों को दूसरे हिस्से के कई दृश्य समझने में दिक्कत हो सकती है।
  5. फिल्म के अंत में कई सवालों के जवाब नहीं मिलते।
  6. अंत जल्दबाज़ी में हो गया ऐसा लगता है।
50%
ख़ुद फैसला करें

देखें या ना देखें

यदि कंगना रनौत के फैन हैं तो ही इस फिल्म को देखें। ज़्यादा उम्मीदें रखेंगे तो आपको निराशा हो सकती है।

  • रेटिंग

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