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कामयाब मूवी रिव्यू: हिंदी फिल्मों के साइड हीरो की असल ज़िंदगी से रूबरू कराती है ये फिल्म

बॉलीवुड की 499 फिल्मों मे साइड हीरो की भूमिका निभाने वाले सुधीर (संजय मिश्रा) (sanjay Mishra) को तलाश है 500 वीं फिल्म के लिए एक शानदार भूमिका की।

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  • सिनेमा – कामयाब
  • सिनेमा प्रकार – ड्रामा
  • अदाकार – संजय मिश्रा, दीपक डोबरियाल
  • निर्देशक – हार्दिक मेहता

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प्रस्तावना

हिंदी फिल्मों मे साइड हीरो का किरदार उतना है अहम होता है जितना फिल्म का हीरो। पर क्या असल ज़िंदगी मे साइड हीरो को उतनी अहमियत मिलती है? इसी सवाल को उठाती है फिल्म कामयाब। विषय बेहद अच्छा है और फिल्म ने कई फेस्टिवल मे इनाम भी हासिल किया है। पर क्या ये फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी? आइये जानते हैं।

कहानी

बॉलीवुड की 499 फिल्मों मे साइड हीरो की भूमिका निभाने वाले सुधीर (संजय मिश्रा) को तलाश है 500 वीं फिल्म के लिए एक शानदार भूमिका की। सुधीर 500 फिल्में करके एक खास रिकॉर्ड बनाना चाहता है। दूसरी ओर असल ज़िंदगी मे सुधीर की ठीक-ठाक पहचान है। उसका “एंजॉइंग माय लाइफ, और ऑप्शन क्या है?” डायलॉग काफी फेमस है। इस पर मीम भी बनते हैं। सुधीर की एक बेटी, दामाद और नवासी भी है।

बेटी का मानना होता है कि उसके पिता को अब काम नहीं करना चाहिए। लेकिन सुधीर के सिर पर धुन सवाल होती है। पर सुधीर अपने सपनों की दुनिया मे मस्त होता है। वो कमबैक करने की ठान लेता है। उसे एक फिल्म भी मिल जाती है। लेकिन क्या सुधीर कमबैक कर पाता है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

मंझे हुए अदाकार संजय मिश्रा ने फिल्म मे अहम भूमिका निभाई है। उनकी जितनी सराहना की जाए वो बेहद कम होगी। बड़ी शिद्दत से उन्होने साइड हीरो की असल ज़िंदगी से रूबरू कराया है। दर्शकों को हँसाने, रुलाने और आख़िर बांधे रखने मे वो कामयाब हुए हैं। उनके साथ सपोर्टिंग रोल दीपक डोबरियाल हैं। उन्होने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है। बाकी कलाकारों ने भी अच्छी अदाकारी की है।

निर्देशन

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हार्दिक मेहता ने फिल्म का निर्देशन किया है। साइड हीरो की सोच, उसके हालात और उसके प्रति समाज का दृष्टिकोण अच्छे दर्शाया है। हार्दिक का काम प्रशंसनीय है।

संगीत

रचिता अरोरा ने फिल्म का संगीत दिया है। फिल्म मे बेवजह गाने ठूँसे नहीं गए। जो वाकई अच्छी बात है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के अनुसार योग्य है।

खास बातें

  1. वास्तविकता को दर्शाती है।
  2. बेहद अच्छा संदेश देती है।
  3. आखिर तक जोड़े रखती है।
  4. 80 और 90 के दशक के फिल्मी दृश्य लुभाते हैं।
  5. परिवार संग देख सकते हैं।

कमजोर कड़ियां

  1. मसाला फिल्मों की शौकिनों के लिए कुछ नहीं
  2. हर वर्ग को प्रभावित नहीं करेगी।

देखें या ना देखें

कामयाब आपका मनोरंजन करती है, आपको सीख भी देती है। यदि आप सिर्फ मसाला फिल्मों के शौकीन नहीं हैं तो इसे ज़रूर देखें।

रेटिंग – 4/5

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