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मोतीचूर चकनाचूर मूवी रिव्यू: अटपटी जोड़ी की चटपटी कहानी

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) और अथिया शेट्टी (Athia Shetty) की जोड़ी पहली बार पर्दे पर नज़र आ रही है, फिल्म मोतीचूर चकनाचूर (Motichoor chaknachoor) मे।

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  • सिनेमा – मोतीचूर चकनाचूर
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी
  • कलाकार – नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अथिया शेट्टी, विभा छिब्बर, नवनी परिहार
  • निर्देशक – देबमित्रा बिस्वाल
  • अवधि – 2 घंटे 15 मिनट

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प्रस्तावना

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) और अथिया शेट्टी (Athia Shetty) की जोड़ी पहली बार पर्दे पर नज़र आ रही है, फिल्म मोतीचूर चकनाचूर (Motichoor chaknachoor) मे। फिल्म की चर्चा के लिए दोनों की केमिस्ट्री ही काफ़ी है। लेकिन ट्रेलर मे दिखाया भोपाल का माहौल भी दर्शकों को बहुत भाया था। पर क्या नवाज़ुद्दीन और अथिया की जोड़ी दर्शकों का मनोरंजन कर पाएगी या नहीं? आइये जानते हैं।

कहानी

मोतीचूर चकनाचूर की कहानी भोपाल के त्यागी और केदार परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। केदार परिवार की नकचढ़ी अनीता (अथिया शेट्टी) से उसके माता पिता उकता चुके हैं। अनीता करीब 10 लड़कों से शादी का प्रस्ताव ठुकरा चुकी है। क्योंकि अनीता को सिर्फ ऐसे लड़के की तलाश है जो शादी के बाद उसे विदेश घुमा सके। तो दूसरी ओर केदार परिवार के पड़ोसी त्यागी परिवार के दुबई रिटर्न होनहार पुष्पिंदर (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) को हर हाल मे शादी करनी है। फिर चाहे लड़की काली, नाटी, मोटी या टकली ही क्यों ना हो। क्योंकि पुष्पिंदर 36 साल का हो गया है और अब उसकी बर्दाश्त करने की सभी हदें समाप्त हो चुकी होती हैं।

ऐसे मे अनिता को पुष्पिंदर के ज़रिये अपना विदेश घूमने का सपना पूरा होता नज़र आता है।फिर क्या,  ख़्वाहिश और मजबूरी की शादी हो जाती है। लेकिन शादी के बाद ऐसा खुलासा होता है, जिसे सुनकर अनिता बेहोश हो जाती हैं! वो खुलासा क्या होता है? अनिता विदेश जा पाती है या नहीं? अनिता और पुष्पिंदर के बीच दरार तो नहीं आ जाती? इन सवालों के जवाब जानने हों तो आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अथिया शेट्टी की जोड़ी बिल्कुल नहीं जचती और यही फ़िल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कहानी को ऐसी ही किसी जोड़ी की तलाश थी। रही बात नवाज़ की तारीफ़ कि तो ये चाँद को दिया दिखाने जैसा होगा। लेकिन फिर भी वो फ़िल्म मे दिखाई अपनी आयु से अधिक लगते हैं। हालांकि उनके फैंस इस बात को यक़ीनन बर्दाश्त कर लेंगे। फिर भी मेरे मन मे एक बार सवाल आया कि यदि राजकुमार राव होते तो? छोड़िए अथिया की बात करते हैं। पहले हिस्से मे ये ठीक लगती हैं लेकिन दूसरे हिस्से शायद इन्हें याद आ गया था कि ये अथिया शेट्टी हैं। इनके अलावा विभा छिब्बर और नवीन परिहार ने भी अच्छी अदाकारी की है।

निर्देशन

देबमित्रा बिस्वाल का निर्देशन अच्छा है। हालांकि कई जगह ये और बेहतर हो सकता था। निर्माता और निर्देशक के बीच फ़िल्म को लेकर अनबन होने की खबर सामने आई थी। दूसरे हिस्से मे कुछ बदलाव साफ़ नज़र आते हैं।

संगीत

फ़िल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर ठीक है। हालांकि दोनों मे बेहतरी की गुंजाइश बहुत ज़्यादा है।

खास बातें

  1. फ़िल्म मे अपनापन नज़र आता है।
  2. गुदगुदाती है।
  3. परिवार संग देख सकते हैं।

कमज़ोर कड़ियां

  1. कास्टिंग और अच्छी हो सकती थी। नवाज़ की जगह राजकुमार और अथिया की जगह भूमि, कृति जैसी कोई। विकल्प हो सकते थे।
  2. संवाद और संगीत और बेहतर हो सकते थे।
  3. कुछ दृश्य बेमतलब लगते हैं।
60%
एक बार ज़रूर देखें

देखें या ना देखें

यह फ़िल्म आपका मनोरंजन करती है। आम ज़िंदगी से जुड़ी फ़िल्म है। इसे परिवार संग एक बार देख सकते हैं।

  • रेटिंग

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