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पागलपंती मूवी रिव्यू: जितना हंसाती है उतना पकाती भी है ये मल्टीस्टारर फिल्म  

वेलकम, (Welcome) मुबारकां (Mubarakan) जैसी कई कामयाब मल्टीस्टारर कॉमेडी बनाने वाले फिल्म निर्माता और निर्देशक अनीस बज़्मी (Anees Bazmi) अब फिल्म पागलपंती(Pagalpanti) लेकर हाज़िर हैं।

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  • सिनेमा – पागलपंती
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी ड्रामा
  • कलाकार – जॉन अब्राहम, अर्शद वारसी, पुलकित सम्राट, अनिल कपूर, इलियाना डीक्रूज, उर्वशी रौतेला, कृति खरबंदा, सौरभ शुक्ला
  • निर्देशक – अनीस बज़्मी
  • अवधि – 2 घंटे 32 मिनट

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प्रस्तावना

वेलकम, (Welcome) मुबारकां (Mubarakan) जैसी कई कामयाब मल्टीस्टारर कॉमेडी बनाने वाले फिल्म निर्माता और निर्देशक अनीस बज़्मी (Anees Bazmi) अब फिल्म पागलपंती(Pagalpanti) लेकर हाज़िर हैं। साथ जॉन अब्राहम, (John Abraham) अर्शद वारसी (Arshad Warsi) और अनिल कपूर (Anil Kapoor) जैसे कई नामी सितारे हैं। ट्रेलर रिलीज़ होते ही दर्शकों मे फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ा। पर क्या फिल्म मे भी वो बात है या नहीं? आइये जानते हैं।

कहानी

पागलपंती की कहानी विदेशी धरती पर बुनी गई है। पनौती, दुर्भाग्य और मनहूसियत का दूसरा नाम यानि राज किशोर (जॉन अब्राहम), जंकी (अर्शद वारसी) और चंदू (पुलकित सम्राट) की पागलपंती से कहानी की शुरुआत होती है। राज, जंकी और चंदू संजना (इलियाना डीक्रूज) से उधार लेकर फ़रार हो जाते हैं। किस्मत उन्हें डॉन राजा साहब (सौरभ शुक्ला) और उनके साले (अनिल कपूर) तक पहुंचाती है। राज, जंकी और चंदू अंजाने मे राजा साहब का करोड़ों का नुकसान करते हैं। जिसकी भरपाई के लिए राजा साहब तीनों को अजीबो ग़रीब नौकरी पर रखते हैं।

दूसरी ओर राजासाहब के दुश्मन टूल्ली और बूल्ली उनकी जान लेना चाहते हैं। राज, जंकी और चंदू के कारण इनकी दुश्मनी और गहरी हो जाती है। एक ऐसा वक़्त आता है कि राजा साहब तीनों को मारने का फ़रमान जारी करते हैं। राज, जंकी और चंदू भागते तो हैं जान बचाने लेकिन वो रातोंरात मालामाल हो जाते हैं।

आख़िर ऐसा क्या होता है जो इन तीनों के पास इतनी दौलत आती है? क्या राजा साहब इन तीनों को माफ़ करते हैं? क्या संजना का पैसा उसे वापिस मिलता है? राजा साब और टूल्ली-बूल्ली भाइयों की दुश्मनी का अंत कैसा होता है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

अर्शद वारसी सबसे बेहतर लगते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग का कोई जवाब नहीं। पुलकित सम्राट के खो जाने का डर था लेकिन उन्होने छाप छोड़ी है। जॉन अब्राहम के कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी लेकिन ऐसा लगता है वो और बेहतर हो सकते थे। इलियाना डीक्रूज, उर्वशी रौतेला और कृति खरबंदा ने अपनी भूमिका के संग न्याय किया है। हालांकि इनका किरदार अधिक नहीं है। सौरभ शुक्ला और अनिल कपूर जीजा-साले की जोड़ी मे जचते हैं। बाकी किरदारों मे बीजेंद्र काला, इनामूल हक, ज़ाकिर हुसेन प्रभावित करते हैं।

निर्देशन

अनीस बज़्मी इससे पहले भी मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्में बनाई हैं। तो इस बार उनसे अधिक की उम्मीद करना लाज़मी था। हालांकि वो इस बार अपनी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। कई जगह गुदगुदाते हैं पर कई जगह वो चूक गए हैं।

संगीत

फिल्म का संगीत साधारण है तेरा बीमार मेरा दिल गाना लुभाता है। बैकग्राउंड स्कोर लुभाता है।

खास बातें

  1. कई नामी सितारे एक साथ देखना दिलचस्प लगता है।
  2. कई दृश्य  गुदगुदाते हैं।
  3. परिवार के साथ देख सकते हैं।

कमजोर कड़ियां

  1. कहानी मे कोई नई और ख़ास बात नहीं।
  2. फिल्म 30 मिनट छोटी हो सकती थी।
  3. कई जगह उबाती है।
  4. दर्शकों को अंत तक रोक पाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं।

देखें या ना देखें

ज़्यादा उम्मीदें ना रखते हुए, ऊपर दी गई बातों को ध्यान मे रखते हुए आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ आप इस फिल्म का मज़ा ले सकते हैं।

रेटिंग 2.5/5

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