Advertisement

पंगा मूवी रिव्यू: अधूरे ख़्वाब को पूरा करने का हौसला देती है ये फिल्म

बेहतरीन अदाकारा कंगना रनौत (kangna ranaut) की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म पंगा आखिरकार रिलीज़ हो रही है। साथ ही अश्विनी अय्यर तिवारी जैसी निर्देशक होने का कारण फिल्म की चर्चा तो बहुत है।

525
  • सिनेमा – पंगा
  • सिनेमा प्रकार- स्पोर्ट्स ड्रामा
  • अदाकार – कंगना रनौत, यज्ञ भसीन, ऋचा चड्ढा, जस्सी गिल, नीना गुप्ता
  • निर्देशक – अश्विनी अय्यर तिवारी
  • अवधि – 2 घंटे 9 मिनट

Advertisement

प्रस्तावना

बेहतरीन निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म पंगा आखिरकार रिलीज़ हो रही है। साथ ही कंगना रनौत जैसी अदाकारा हैं तो फिल्म की चर्चा तो बहुत है। आइये जानते हैं ये फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं।

कहानी

कभी भारतीय कबड्डी टीम की कप्तान रह चुकी जया निगम (कंगना रनौत) अपने पति प्रशांत श्रीवास्तव (जस्सी गिल) और बेटे आदि (यज्ञ भसीन) के लिए करियर कुर्बान कर देती हैं। स्पोर्ट्स कोटे मे जया को रेलवे मे नौकरी मिल जाती है। हालांकि जया को उसका अधूरा सपना अंदर ही अंदर कचोटते रहता है। एक वक़्त ऐसा आता है कि जया को लगता है उसे उसका सपना पूरा करने के लिए फिर से नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि ये नामुमकिन सी लाग्ने वाली बात होती है।

तो क्या जया फिर से नई शुरुआत कर पाती है? इस राह मे आने वाली तमाम चुनौतियों का वो सामना कर पाती है? क्या जया का सपना पूरा हो पाता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

कंगना रनौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें बॉलीवुड की क्वीन क्यों कहा जाता है। उनकी अदाकारी काबिले तारीफ़ है। फिल्म कंगना के बेटे का किरदार निभा रहे यज्ञ भसीन ने शानदार अदाकारी की है। जब जब वो स्क्रीन पर होते हैं फिल्म और भी ज़्यादा मज़ेदार लगती है। ऋचा चड्ढा और नीना गुप्ता ने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी बखुबी निभाई है। जस्सी गिल ने अच्छा प्रयास किया है। हालांकि वो और बेहतर हो सकते थे।

निर्देशन

नील बटे सन्नाटा, बरेली की बर्फ़ी जैसी फिल्में निर्देशित कर चुकीं निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी ने पंगा के ज़रिये आपको सिखाने, हँसाने और रुलाने मे कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनका निर्देशन ही है जो साधारण कहानी को मनोरंजक बनाता है।

संगीत

शंकर एहसान लॉय का संगीत है। शीर्षक गीत कमाल है। और भी गाने याद रहते हैं। बैकग्राउंड स्कोर बहुत अच्छा है।

खास बातें

  1. मनोरंजन और संदेश से भरपूर कहानी।
  2. फिल्मी ड्रामा नहीं बल्कि अपने आस पास की कहानी लगती है।
  3. आखिर तक बांधे रखती है।
  4. पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं।

कमजोर कड़ियाँ

  1. दूसरे हिस्से की शुरुआत मे फ़िल्म थोड़ी धीमी लगती है।
  2. जया निगम के संघर्ष मे कमी नज़र आती है। इस हिस्से को और अधिक मनोरंजक बनाया जा सकता था।
  3. आदि के अलावा भी औरों के संवाद और बेहतर हो सकते थे।
  4. कुछ समय बाद कहानी प्रेडिक्टेबल हो जाती है।

देखें या ना देखें

ये फ़िल्म आपका मनोरंजन करती है और साथ ही अच्छा सबक, हौसला भी देती है। आप इस फ़िल्म को अपने पूरे परिवार के साथ देखें।

रेटिंग 3.5/5

Advertisement