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पति पत्नी और वो रिव्यू: हंसते-हंसाते शादी के बंधन की गरिमा समझाती है ये फिल्म

हैप्पी भाग जाएगी की दो कड़ियां बनाने वाले मुदस्सर अज़ीज़ (Mudassar Aziz) फिल्म पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh) के साथ हाज़िर हैं। 1978 मे इसी नाम से आई फिल्म पर ये आधारित है।

1,994
  • सिनेमा – पति पत्नी और वो
  • सिनेमा प्रकार – कॉमेडी ड्रामा
  • अदाकार – कार्तिक आर्यन, भूमि पेडणेकर, अनन्या पांडे, अपारशक्ति खुराना, सनी सिंह
  • निर्देशक – मुदस्सर अज़ीज़
  • अवधि – 2 घंटे 6 मिनट

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प्रस्तावना

हैप्पी भाग जाएगी की दो कड़ियां बनाने वाले मुदस्सर अज़ीज़ (Mudassar Aziz) फिल्म पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh) के साथ हाज़िर हैं। 1978 मे इसी नाम से आई फिल्म पर ये आधारित है। ट्रेलर रिलीज़ हुआ डायलॉग को लेकर बवाल भी हुआ। फिर भी दर्शक फिल्म से ढेर सारी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। आइये जानते हैं फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं।

कहानी

कानपुर के अभिनव त्यागी (कार्तिक आर्यन) की कॉलेज मे टॉप करने के तुरंत बाद लखनऊ की वेदिका त्रिपाठी (भूमि पेडणेकर) से शादी हो जाती है। अभिनव को सकराती नौकरी मिल जाती है तो वक़्त बिताने के लिए वेदिका भी कॉलेज मे फ़िज़िक्स टीचर बन जाती है। कुछ सालों तक दोनों की शादीशुदा ज़िंदगी शानदार होती है। लेकिन फिर अभिनव की ज़िंदगी मे तपस्या (अनन्या पांडे) की एंट्री होती है।

तपस्या को देख अभिनव की तपस्या भंग हो जाती है। लेकिन कहते हैं ना इश्क़ और मुश्क छुपाए नहीं छुपता, इसकी भनक वेदिका को लग ही जाती है। वेदिका पति अभिनव को छोड़ मायके चली जाती है। जिसके बाद अभिनव ना घर का रहता है और ना ही घाट का। क्या अभिनव वेदिका को मना पाता है? या तपस्या संग घर बसा लेता है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

कार्तिक आर्यन अपनी इमेज से हटकर पति के किरदार मे नज़र आए हैं। अपनी भूमिका के संग उन्होने न्याय किया है लेकिन कई जगह ऐसा लगता है कि वो और बेहतर हो सकते थे। भूमि पेडणेकर ने हमेशा कि तरह शानदार अदाकारी की है। उनकी जितनी सराहना की जाए कम है। अनन्या स्क्रीन पर बहुत खूबसूरत लगती हैं। अपनी छाप छोडने मे वो कामयाब हुई हैं। अपारशक्ति खुराना ने बेहतरीन अदाकारी की है। अपनी शानदार टाइमिंग से दर्शकों को हँसाने मे वो कामयाब हुए हैं। सनी सिंह सस्ते जिमी शेरगिल लगते हैं।

निर्देशन

मुदस्सर अज़ीज़ का निर्देशन बहुत अच्छा है। हालांकि कई जगह ये और बेहतर हो सकता था।

संगीत

फिल्म के गाने अधिक नहीं लुभाते लेकिन बैकग्राउंड स्कोर प्रभावी है।

खास बातें

  1. हंसते हंसाते शानदार संदेश देती है।
  2. आख़िर तक बांधे रखती है।
  3. परिवार संग देख सकते हैं।

कमज़ोर कड़ियां

  1. पहला हिस्सा बेहद सुस्त और नीरस है।
  2. संवाद और बेहतर हो सकते थे।
  3. एक समय के बाद फिल्म प्रेडिक्टेबल हो जाती है।

देखें या ना देखें

फिल्म का पहला हिस्सा भले ही कमज़ोर हो लेकिन कुल मिलाकर ये फिल्म आपका मनोरंजन करती है और साथ ही अच्छा संदेश भी देती है। आप अपने पूरे परिवार संग इसे एक बार देख सकते हैं।

रेटिंग – 3/5

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