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सैटेलाइट शंकर रिव्यू: मनोरंजन और संदेश से भरपूर पारिवारिक फिल्म

सलमान खान (Salman Khan) द्वारा हीरो फिल्म से बॉलीवुड मे कदम रखने वाले सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) लंबे अंतराल के बाद सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) फिल्म के द्वारा रुपहले पर्दे पर लौट रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर फैंस का उत्साह बढ़ाने मे कामयाब रहा है। आइये जानते हैं फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं।

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  • सिनेमा – सैटेलाइट शंकर
  • सिनेमा प्रकार – ड्रामा
  • अदाकार – सूरज पंचोली, मेघा आकाश, पलोमी घोष
  • निर्देशक – इरफ़ान कमाल
  • अवधि – 2 घंटे 14 मिनट

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प्रस्तावना

सलमान खान (Salman Khan) द्वारा हीरो फिल्म से बॉलीवुड मे कदम रखने वाले सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) लंबे अंतराल के बाद सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) फिल्म के द्वारा रुपहले पर्दे पर लौट रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर फैंस का उत्साह बढ़ाने मे कामयाब रहा है। आइये जानते हैं फिल्म आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं।

कहानी

सरहद-ए-कश्मीर से कहानी की शुरुआत होती है। पाकिस्तान के नापाक मंसूबों के चलते तीन सैनिकों की छुट्टी रद्द हो जाती है। ऐसे मे भारतीय सेना का रायफ़ल मैन केपीजे शंकर उर्फ़ सैटेलाइट शंकर (सूरज पंचोली) दुश्मनों से लड़ते हुए घायल हो जाता है। इसलिए उसे 8 दिन आराम करने की नसीहत की जाती है। सैटेलाइट शंकर अपने आला अफ़सर से गुजारिश करता है कि ये 8 दिन वो अस्पताल मे नहीं बल्कि घर जाकर आराम करेगा। इनकी अनुमति भी उसे मिल जाती है। 8 दिन बाद वापस लौटने की सैनिक शपथ लेकर सैटेलाइट शंकर निकल पड़ता है।

सिर्फ़ सैटेलाइट शंकर को छुट्टी मिलती है और बाकियों की छुट्टी रद्द हो जाती है। इसलिए बाकियों के घर जाकर उनके परिवार से मिलने की ज़िम्मेदारी भी सैटेलाइट शंकर को मिलती है। फिर शुरू होता है सैटेलाइट शंकर की छुट्टियों का सफ़र। उसे जाना तो होता है केरल लेकिन उसके साथ ऐसी घटनाएं होती जाती हैं कि वो देश के कई हिस्सों मे पहुँच जाता है।

सैटेलाइट शंकर जहां जाता है वहां कोई ना कोई समस्या होती है। उसे वो सुलझाकर वो आगे बढ़ता है। सैटेलाइट शंकर के सामने क्या समस्याएं आती हैं? इनसे वो कैसे निपटता है? क्या सैटेलाइट शंकर की सैनिक शपथ पूरी होती है या नहीं ? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

सूरज पंचोली ने इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि वो सलमान खान की कॉपी करते नज़र आए पर शुरू से आखिर तक एक ही लय मे नज़र आए। कुछ दृश्य तो बेहद शानदार थे। मेघा आकाश छोटे सी भूमिका मे छाप छोड़ गईं। बाकी के कलाकारों ने भी अच्छी अदाकारी की है।

निर्देशन और छायांकन

इरफ़ान कमाल ने फिल्म का निर्देशन किया है। दर्शकों का उत्साह आखिर तक बरक़रार रखने मे वो कामयाब हुए हैं। जितन हरमित सिंह का छायांकन भी ठीक-ठाक है।

संगीत

फिल्म का संगीत ठीक-ठाक है लेकिन आकर्षक नहीं।

खास बातें

  1. कहानी मनोरंजन और संदेश से भरपूर।
  2. अंत तक बांधे रखती है।
  3. परिवार संग देख सकते हैं।

कमजोर कड़ियाँ

  1. पहला हिस्सा प्रभावशाली नहीं है।
  2. संगीत बेहतर हो सकता था।
  3. छायांकन अच्छा हो सकता था।

देखें या ना देखें

सूरज पंचोली के फैंस इसे देख सकते हैं। बाकी लोग भी परिवार संग हल्की-फुलकी मनोरंजन और संदेश से भरपूर फिल्म देखना चाहते हैं तो देख सकते हैं।

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एक बार देख सकते हैं

सूरज पंचोली के फैंस इसे देख सकते हैं। बाकी लोग भी परिवार संग हल्की-फुलकी मनोरंजन और संदेश से भरपूर फिल्म देखना चाहते हैं तो देख सकते हैं।

  • रेटिंग 3

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