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शिकारा मूवी रिव्यू: कश्मीर के काले दिन का दर्द बयां करती है ये फिल्म

1947 मे हुए हिंदुस्तान के विभाजन के बाद देश मे कई घंटनाएं घटीं जो बेहद दर्दनाक थीं। उन्हीं मे से एक है 1990 मे कश्मीरी घाटी हुई घटना। इसी पर शिकारा (shikara) फिल्म की कहानी आधारित है।

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  • सिनेमा – शिकारा
  • सिनेमा प्रकार– हिस्टोरिकल ड्रामा
  • कलाकार– आदिल खान, सादिया खान
  • निर्देशक – विधु विनोद चोपड़ा
  • अवधि– 2 घंटे

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प्रस्तावना

1947 मे हुए हिंदुस्तान के विभाजन के बाद देश मे कई घंटनाएं घटीं जो बेहद दर्दनाक थीं। उन्हीं मे से एक है 1990 मे कश्मीरी घाटी हुई घटना। इसी पर शिकारा (shikara) फिल्म की कहानी आधारित है। फिल्म अपने विषय के कारण चर्चा वो विवादों मे भी रही। आइये जानते हैं ये फिल्म आपसे क्या कहना चाहती है और आपका मनोरंजन कर पाएगी या नहीं?

कहानी

कश्मीर की घाटी का वासी शिव कुमार धर (आदिल खान) और उसकी पत्नी शांति के साथ कश्मीर (सादिया खान) एक खुशनुमा जिंदगी जी रहा हैं। मेहनत और मशक्कतों से ये अपने सपने का घर बनाते हैं, जिसका नाम शिकारा रखते हैं। दूसरी ओर राजनीतिक गतिविधियों के कारण घाटी सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है। इसी कारण शिव और शांति समेत कई कश्मीरी पंडित घाटी त्याग देते हैं। रिफ़्यूजी कैंप मे ज़िंदगी बसर करते हुए अपने घर वापस जाने का सपना देखते हैं। क्या ये अपने घर लौटते हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अदाकारी

शिव और शांति के किरदार में आदिल खान और सादिया जचते हैं। कश्मीरी अंदाज़ मे दोनों लुभाते हैं। दोनों का काम सराहनीय है। बाकी के कलाकारों ने ठीक ठाक काम किया है।

निर्देशन और छायांकन

विधु विनोद चोपड़ा सालों बाद इस फिल्म को लेकर आए हैं। कई दृश्यों को उन्होने शानदार तरीके से निर्देशित किया है। छायांकन भी अच्छा है।

संगीत

संदेश शांडिल्य, अभय सपोरी और रोहित कुलकर्णी ने संगीत दिया है। जो सराहनीय है। ए आर रहमान द्वारा दिया गया बैकग्राउंड स्कोर भी शानदार है।

खास बातें

  1. वास्तविकता पर ज़ोर।
  2. छायांकन, संपादन प्रभवित करता है।
  3. आखिर तक बांधे रखती है।

कमजोर कड़ियाँ

  1. दूसरा हिस्सा कमज़ोर लगता है।
  2. रोमांस पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।
  3. मसाला फिल्मों के शौकिनों के लिए कुछ नहीं।

देंखे या ना देंखे

यह फिल्म इतिहास के दर्दनाक हालात को अपने तरीके से रूबरू कराती है। यदि आप ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं तो ही देखें।

रेटिंग – 2/5

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