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सुपर 30 मूवी रिव्यू: जितनी मनोरंजक उतनी ही प्रेरणादायक है हकदार को राजा बनाने की यह कहानी

‘सुपर 30’ की कहानी शिक्षक आनंद कुमार की ज़िंदगी के कुछ चुनिंदा प्रेरणादायक हिस्सों पर रौशनी डालती है। बिहार का आनंद कुमार (ऋतिक रोशन) गणित में बेहद माहिर होता है।

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  • सिनेमा – सुपर 30
  • सिनेमा प्रकार – बायोपिक
  • अदाकार – ऋतिक रोशन, पंकज त्रिपाठी, मृणाल ठाकुर
  • निर्देशक – विकास बहल
  • अवधि – 2 घंटे 34 मिनट

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प्रस्तावना

गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाकर उन्हें आईआईटी में दाखिला लेने के काबिल बनाने वाले शिक्षक आनंद कुमार की ज़िंदगी पर आधारित फिल्म सुपर 30 आख़िरकार रिलीज़ होने को है। ग्रीक गॉड ऋतिक रोशन ने आनंद कुमार की भूमिका निभाई है। फिल्म चर्चा में तो है, लेकिन क्या यह आपका मनोरंजन कर पाएगी? आइये जानते हैं।

कहानी

‘सुपर 30’ की कहानी शिक्षक आनंद कुमार की ज़िंदगी के कुछ चुनिंदा प्रेरणादायक हिस्सों पर रौशनी डालती है। बिहार का आनंद कुमार (ऋतिक रोशन) गणित में बेहद माहिर होता है। गणित के प्रति आनंद की इतनी दीवानगी होती है कि वो अपनी महबूबा ऋतू (मृणाल ठाकुर) से भी इसी भाषा में बात करता है। आनंद को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से एडमिशन का प्रस्ताव आता है, लेकिन ऐसे हालात हो जाते हैं कि वो दाखिला नहीं ले पाता। आनंद ज़िंदगी की जद्दोजहद में लग जाता है। घर चलाने के लिए पापड़ भी बेचता है।

इसी बीच उसकी मुलाक़ात कोचिंग क्लास चलाने वाले लल्लन (आदित्य श्रीवास्तव ) से होती है। फिर क्या आनंद की ज़िंदगी बदल जाती है। लेकिन आनंद को एहसास होता है कि यहां सिर्फ़ राजा का ही बेटा राजा बन रहा है। फिर आनंद ठान लेता है कि वो गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देगा। यहां शुरू होती है आनंद के ज़िंदगी की असली परीक्षा। क्या आनंद इस परीक्षा में सफल होता है? आनंद कैसे-कैसे संघर्षों का सामना करता है? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

अदाकारी

ग्रीक गॉड कहे जाने वाले, अक्सर हैंडसम हीरो का किरदार निभाने वाले ऋतिक रोशन पहली बार भोजपुरी बोलते नज़र आए। उन्होंने काफ़ी अच्छा प्रयास किया और इसमें सफ़ल भी हुए। शुरू से आख़िर तक ऋतिक अपने लहजे में सटीक नज़र आए। मृणाल की भूमिका अधिक नहीं पर वो दिल जीतने में कामयाब हुईं। पकंज त्रिपाठी, आदित्य श्रीवास्तव अपना प्रभाव छोड़ने में फिर कामयाब हुए।

निर्देशन

विकास बहल ने निर्देशन किया है। वो पहले क्वीन बना चुके हैं। इस बार उनसे और अधिक उम्मीदें थीं। उन्होंने अपना काम अच्छे से किया है पर वो और अच्छे हो सकते थे।

संगीत

अजय-अतुल संगीत अच्छा है। कुछ गाने लुभाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर कहानी को सुवाता नहीं है।

ख़ास बातें

  1. कहानी मनोरंजन और संदेश से भरपूर है।
  2. कहानी आपको आख़िर तक जोड़े रखती है।
  3. पूरे परिवार के साथ आप इसे देख सकते हैं।

कमज़ोर कडियां

  1. संवाद और अच्छे हो सकते थे।
  2. कई जगह बनावटीपन लगता है।
  3. बैकग्राउंड संगीत अटपटा लगता है।
70%
शानदार

देखें या ना देखें

यह फिल्म मनोरंजन के साथ सिखाती भी है। ऋतिक अलग तरह की भूमिका में हैं। आप इसे अपने परिवार संग देख सकते हैं

  • Rating

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